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नदी किनारे छोटी सी झोपडी, मिट्टी के दिये बेचकर बदली बाप-बेटी की किश्मत ।

एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाली गौरी और उसके बूढ़े पिता हरिया की यह कहानी मेहनत, हिम्मत और उम्मीद की कहानी है। घर में खाने तक के पैसे नहीं थे, लेकिन गौरी ने हार मानने के बजाय अपने पिता के पुराने हुनर को अपना सहारा बनाया। तालाब की मिट्टी से बनाए गए छोटे-छोटे दीयों से शुरू हुआ उसका सफर धीरे-धीरे पूरे…

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