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जेठानी ने उड़ाया गरीबी का मज़ाक! बहू ने 'तरबूज के छिलकों' से रचा इतिहास

जेठानी ने उड़ाया गरीबी का मज़ाक! बहू ने 'तरबूज के छिलकों' से रचा इतिहास ​जब घमंडी जेठानी ने लाल तरबूज खाकर उसके बचे हुए छिलके (कचरा) छोटी बहू के मुँह पर फेंक कर मारे, तो छोटी बहू फूट-फूट कर रोने लगी! जेठानी ने ताना मारा कि तेरी औकात सिर्फ ये कचरा खाने की है! ​लेकिन एक होशियार बहू कभी हार नहीं मानती!

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