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रात के 2 बजे उसने हार मान ली… तभी माँ कात्यायनी जागीं
- क्रिएटर
- Katha Jagat
- अवधि
- 1:07
- मूल भाषा
- मूल भाषा: हिन्दी
- शैलियाँ
रात के 2 बजे उसने कहा — "अब मुझसे नहीं होगा…" और तभी कमरे में एक अजीब खामोशी छा गई… कोई डर नहीं… बस एक आवाज़ आई अंदर से — "भागना बंद करो।" माँ कात्यायनी मंदिर में नहीं… उस पल में प्रकट होती हैं जब इंसान टूटकर भी खड़े होने का फैसला करता है। अब सवाल तुमसे है — तुम भागोगे… या लड़ोगे?



